चिड़िया आती है
डाल जाती तिनके फ़र्श पर
हवा आती है
बिखेर जाती धूल फ़र्श पर
सूरज आता है सजा
जाता चिंदियाँ फ़र्श पर
मुन्ना आता है उ
लट देता कटोरी फ़र्श पर
मम्मी आती हैं
बीनतीं दाल-चावल फ़र्श पर
पापा आते हैं
उतार देते जूते फ़र्श पर
महरी आती है
समेट लेती है सब कुछ
अपने बिवाई पड़े हाथों में
और इस तरह लिखती है हर रोज़
एक कविता फ़र्श पर।
-निर्मला गर्ग
Explanation:
मतलब: चिड़िया आती है और अपने खाने या तिनके फ़र्श पर गिरा देती है।
English: The bird comes and drops straw on the floor.
मतलब: हवा चलती है और फ़र्श पर धूल बिखेर देती है।
English: The wind comes and scatters dust on the floor.
मतलब: सूरज की रोशनी पड़ती है और फ़र्श पर छोटे-छोटे चमकदार धब्बे (चिंदियाँ) दिखते हैं।
English: Sunlight comes and the floor gets decorated with tiny sparkling spots.
मतलब: मुन्ना (बच्चा) आता है और फ़र्श पर कटोरी उलट देता है।
English: Munna comes and overturns the bowl on the floor.
मतलब: मम्मी फ़र्श पर दाल और चावल छाँटती हैं।
English: Mom comes and sorts lentils and rice on the floor.
मतलब: पापा अपने जूते फ़र्श पर उतार देते हैं।
English: Dad comes and takes off his shoes on the floor.
मतलब: महरी (माली या नौकरानी) आती है और सब चीज़ें साफ़ करके अपने हाथ में ले लेती है।
English: The maid comes and gathers everything in her hardworking hands.
मतलब: रोज़ की ये घटनाएँ जैसे फ़र्श पर कविता बनाती हैं।
English: And in this way, every day, a poem is written on the floor.
यह कविता रोज़मर्रा की छोटी-छोटी घटनाओं को खूबसूरती से दर्शाती है। फ़र्श पर गिरने वाले तिनके, धूल, चिंदियाँ, उलटी कटोरी, बीनते हुए दाल-चावल और जूते सब मिलकर रोज़मर्रा का एक दृश्य बनाते हैं। कवि ने इसे “कविता फ़र्श पर” कहा है, क्योंकि हर रोज़ की ये छोटी-छोटी चीज़ें जैसे एक कविता रचती हैं।
शब्दार्थ:
चिंदियाँ - छोटे-छोटे टुकड़े, धूप के छोटे-छोटे चकते
बीनना - चुनना
महरी - काम करने वाली, घरेलू सहायिका
बिवाई - हाथ-पैर के चमड़े का फटना
1. पाठ से
(क) कविता में फ़र्श पर कौन-कौन और क्या-क्या करते हैं?
जवाब: कविता “फ़र्श पर” में फ़र्श पर कई लोग और चीज़ें कुछ न कुछ काम करती हैं। चिड़िया तिनके डालती है, हवा धूल बिखेरती है, सूरज की रोशनी फ़र्श पर चमकदार धब्बे बनाती है, मुन्ना कटोरी उलट देता है, मम्मी दाल और चावल बीनती हैं और पापा अपने जूते उतारते हैं।
(ख) फ़र्श पर सभी के द्वारा कुछ न कुछ काम करने की बात कविता में हुई है, मगर महरी के काम को ही कविता लिखना क्यों कहा गया है?
जवाब: कविता में फ़र्श पर सभी लोग और चीज़ें कुछ न कुछ काम करती हैं। चिड़िया तिनके डालती है, हवा धूल बिखेरती है, सूरज फ़र्श पर चमकदार धब्बे बनाता है, मुन्ना कटोरी उलट देता है, मम्मी दाल और चावल बीनती हैं और पापा अपने जूते उतारते हैं। सभी के काम अलग-अलग हैं, लेकिन फैलाव और गड़बड़ी रहती है। महरी आती है और सब चीज़ों को अपने मेहनत से थके हुए हाथों में समेट लेती है। उसकी मेहनत से फ़र्श साफ़ हो जाता है। कवि ने कहा कि महरी रोज़ फ़र्श पर कविता लिखती है, क्योंकि उसकी मेहनत से सभी घटनाएँ जैसे एक सुंदर कविता का रूप ले लेती हैं।